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Gariaband. गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के डुटकैया गांव में रविवार को हालात अचानक बेकाबू हो गए, जब सांप्रदायिक तनाव ने हिंसक रूप ले लिया। बड़ी संख्या में जुटी भीड़ ने गांव में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाते हुए उनके घरों पर हमला कर दिया। इस दौरान आधा दर्जन से अधिक घरों में जमकर तोड़फोड़ की गई, वाहनों को आग के हवाले किया गया और कई घरों में लूटपाट के बाद आगजनी की गई। हालात इतने गंभीर हो गए कि पुलिस को महिलाओं और बच्चों की जान बचाने के लिए कई घंटों तक ढाल बनकर खड़ा रहना पड़ा। घटना में कम से कम सात पुलिसकर्मी घायल हो गए, जबकि अल्पसंख्यक समुदाय के कई लोग भी जख्मी हुए हैं। भय और असुरक्षा के माहौल के चलते प्रभावित परिवारों को गांव छोड़कर बाहर शरण लेनी पड़ी है।
सीसीटीवी फुटेज में कैद भयावह मंजर
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज में साफ तौर पर देखा गया है कि हमलावरों ने पहले अल्पसंख्यक परिवारों को घरों में बंधक बनाकर रखा, इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से उनके घरों के कैमरे तोड़े, फिर लूटपाट की और अंत में आगजनी की। फुटेज सामने आने के बाद पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
घायल अल्पसंख्यक नागरिकों की सूची
हिंसा में घायल हुए अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में शामिल हैं-
कसुमुद्दीन कुरैशी उर्फ राजू खान,
अनवर खान,
अमजद खान उर्फ बल्ला खान,
सलीम खान,
जब्बार खान,
शाहिद खान,
रफीक खान,
अल्ताफ खान,
मुन्ना खान,
छोटे मियां,
शबाना बेगम,
नाजनीन बेगम,
रुबीना कुरैशी,
जरीना बेगम,
शिरीन,
आशमा बेगम।
इनमें से कई लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया है, जबकि कुछ को गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस भी रही हमले की चपेट में
हिंसा के दौरान पुलिस पर भी पथराव किया गया। जानकारी के अनुसार, राजिम के सरकारी अस्पताल में 5 आरक्षक भर्ती हैं, जबकि 1 आरक्षक को रायपुर के रामकृष्ण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा, गरियाबंद एसपी के हाथ में भी चोट आई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, हालात को नियंत्रित करने में जवानों को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
हिंसा की पृष्ठभूमि
पुलिस के अनुसार, यह हिंसा इससे कुछ घंटे पहले हुई एक अन्य घटना की प्रतिक्रिया में भड़की। रविवार सुबह आरिफ खान और रायपुर से आए उसके दो साथियों ने गांव में चार लोगों पर हमला कर दिया था। वर्ष 2024 में डुटकैया गांव के ही रहने वाले आरिफ खान और उसके दो साथियों पर गांव के चावेश्वर शिव मंदिर में तोड़फोड़ का आरोप लगा था। उस समय आरिफ नाबालिग था, इसलिए उसे जुवेनाइल सुधार गृह भेजा गया था। बाद में उसे जमानत मिल गई थी, लेकिन वह गांव वापस नहीं लौटा था। रविवार को आरिफ रायपुर से अपने दो साथियों के साथ गांव लौटा था। जिन लोगों पर हमला किया गया, उनमें से कम से कम एक व्यक्ति मंदिर तोड़फोड़ मामले का गवाह बताया जा रहा है। इस घटना के बाद पुलिस ने आरिफ और उसके साथियों के खिलाफ चार आपराधिक मामले दर्ज किए और ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
शांति प्रयास विफल, उमड़ी हिंसक भीड़
पुलिस के समझाइश देने के बाद भी हालात ज्यादा देर शांत नहीं रहे। कुछ ही समय में डुटकैया और आसपास के गांवों से सैकड़ों लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई। लाठी, ईंट-पत्थर और केरोसिन की बोतलें लेकर आई इस भीड़ ने गांव में रहने वाले करीब 10 मुस्लिम परिवारों के घरों में घुसने की कोशिश की। परिवारों ने डर के कारण खुद को घरों में बंद कर लिया।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार “भीड़ ने पहले वाहनों में आग लगाई और फिर घरों में घुसने की कोशिश की। हम संख्या में कम थे और राजिम कुंभ मेले के कारण पुलिस बल की कमी थी। कई घंटों तक हमने ढाल बनकर महिलाओं और बच्चों को बचाया।”
देर रात नियंत्रण में आई स्थिति
रात करीब 9 बजे दो चरणों में अतिरिक्त पुलिस बल गांव पहुंचा। तब तक पुलिस ने फंसे हुए लोगों को एक जगह सुरक्षित इकट्ठा कर लिया था। अंतिम बल के पहुंचने के बाद पुलिस ने बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया और करीब 20 लोगों को बस में बैठाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। बाद में मदरसे में फंसे 6–7 बच्चों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालात आधी रात के बाद नियंत्रण में आए। हालांकि, पुलिस जब लौटने की तैयारी कर रही थी, तभी भीड़ में से एक महिला ने एक पुलिसकर्मी पर ईंट फेंक दी, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई।
फिलहाल हालात तनावपूर्ण, पुलिस तैनात
फिलहाल गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है, बल्कि सामाजिक सौहार्द पर भी गहरा आघात मानी जा रही है।
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